इजरायल की सेना को अमेरिका से कितनी फंडिंग मिलती है ?

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Israel Hamas War: इजरायल और हमास के बीच जारी जंग पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. इजरायल ताबड़तोड़ हमास के ठिकानों पर हमला कर रहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हमास के पूरी तरह से खात्मे के बाद ही यह लड़ाई बंद होगी. ऐसे में इजरायल और हमास के बीच जारी जंग दिन प्रतिदिन भीषण होता जा रह है. एक तरफ जहां हमास को ईरान समेत कई अन्य इस्लामिक देशों का सपोर्ट मिल रहा है तो वहीं इजरायल के समर्थन में अमेरिका, फ्रांस समेत कई बड़े देश हैं. 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिकी जनता से अपील की है कि वे इजरायल की मदद के लिए अरबों डॉलर खर्च करें ताकि वह हमास से लड़ सके. गौरतलब है कि अमेरिका अपने 2000 सैनिकों को अलर्ट पर रखा है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर कभी भी इजरायल भेजा जा सकता है. खैर यह जानना जरुरी है कि आखिर क्या वजह है जिससे अमेरिका इजरायल की इतनी मदद कर रहा है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन युद्ध के बीच खुद इजरायल का दौरा कर चुके हैं. 

इजरायल को अमेरिका से कितनी सैन्य सहायता मिली है?

अमेरिका ने बीते कुछ सालों में इजरायल को दुनिया की सबसे उन्नत सेना में से एक बनाने में मदद की है. अमेरिकी फंड की मदद से इजरायल अपनी सैन्य ताकत को मजबूत बनाता है. अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने साल 2022 में इजरायल को 4.8 अरब डॉलर की मदद दी थी और साल 2023 में अब तक ही 3.8 अरब डॉलर की आर्थिक मदद दे चुका है. इसके साथ ही, साल 1946 और 2023 के बीच इजरायल अमेरिका से लगभग 263 बिलियन डॉलर प्राप्त कर चुका है.

कितनी मजबूत है इजरायली सेना 

 इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) 2023 के अनुसार, इजरायल में सेना, नौसेना और अर्धसैनिक बलों में 169,500 सक्रिय सैन्यकर्मी हैं. अतिरिक्त 465,000 इसके आरक्षित बल हैं, जबकि 8,000 इसके अर्धसैनिक बल का हिस्सा हैं. इतना ही नहीं, इजरायल में 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है. एक बार भर्ती होने के बाद, पुरुषों से 32 महीने और महिलाएं 24 महीने तक सेना में सेवा देती हैं.

मिसाइल हमलों से बचाता है आयरन डोम

इजरायल के पास आयरन डोम नाम का एक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है. ये अपनी ओर दागी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर देता है. इसे 2006 में हिज़्बुल्लाह के साथ युद्ध के बाद विकसित किया गया था, जहां इजरायल में हजारों रॉकेट लॉन्च किए गए थे. साल 2011 से अमेरिका इजरायल के आयरन डोम में 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है. IISS के अनुसार, इजरायल के आयरन डोम सिस्टम ने 2021 में हमास और अन्य फलस्तीनी समूहों द्वारा दागे गए 90 प्रतिशत से अधिक रॉकेटों को रोक दिया.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के अनुसार, 2022 में इजरायल ने अपनी सेना पर 23.4 बिलियन डॉलर खर्च किए. 2018-2022 की अवधि में यह राशि प्रति व्यक्ति 2,535 डॉलर है, जो कतर के बाद प्रति व्यक्ति सेना पर खर्च करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. 2022 में इजरायल ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.5 प्रतिशत सेना पर खर्च किया, जो दुनिया में 10वां सबसे बड़ा प्रतिशत है.

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