इजरायल-हमास जंग: जानें कैसे वॉर के दौरान लागू होते हैं इंटरनेशनल लॉ?

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Israel Hamas International Rule of War: इस वक्त हमास और इजरायल के बीच घमासान युद्ध चल रहा है. दोनों पक्षों के हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं. 7 अक्टूबर को हुए हमास के हमले के बाद इजरायल ने युद्ध के घोषणा कर दी. आपको बता दें कि युद्ध के भी कुछ नियम हैं. युद्ध के नियम यूनाइटेड नेशन चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कानूनों और प्रस्तावों के एक समूहों की ओर से बनाए गए है. इसके मुताबिक आक्रामक युद्धों को प्रतिबंधित करने का प्रावधान है. हालांकि, ये देशों को आत्मरक्षा का भी अधिकार देता है.

वॉर जोन के तरीके में जिनेवा कन्वेंशन सहित अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून शामिल हैं, जिसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद तैयार किया गया और लगभग हर देशों ने इस पर सहमति जताई. साल 1949 में जिन चार बातों पर सहमति बनी, उनमें यह तय किया गया कि वॉर टाइम में नागरिकों, घायलों और कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए. कोई भी पक्ष एक दूसरे के साथ अपमानजनक व्यवहार नहीं कर सकते हैं.

युद्ध के कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
युद्ध के कानून के मुताबिक नागरिकों, बस्तियों, मानवीय कार्यकर्ताओं पर जानबूझकर हमला, सैन्य रूप से जरूरी न होने पर संपत्ति को नष्ट करना एक वॉर क्राइम कहलाता है. इसके अलावा अन्य समझौते है, जिस पर सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, वो है युद्ध के वक्त रासायनिक या जैविक युद्ध सामग्री के इस्तेमाल पर प्रतिबंध.

इस तरह के नियम राष्ट्रों के बीच युद्ध और संघर्ष दोनों पर लागू होते हैं, जैसा कि इजरायल और हमास के युद्ध में होना चाहिए. हालांकि, इस मामले में एक पक्ष राज्य या देश नहीं है. वो है हमास, जो एक चरमपंथी समूह है और गाजा पट्टी में रहता है.

क्या हमास ने किए युद्ध अपराध

हमास ने इजरायली कस्बों और शहरों पर 7 अक्टूबर को हजारों रॉकेट दागे हैं. हमास ने गाजा से सीमा पार सैकड़ों बंदूकधारी भेजे हैं. उन्होंने बच्चों और बुजुर्गों सहित नागरिकों पर उनके घरों में हमला किया और हत्या कर दी. इस दौरान कई अन्य लोगों का अपहरण कर लिया. इजरायल का कहना है कि अब तक हमास के हमले में कम से कम 1,400 लोग मारे गए और 199 अन्य लोगों का अपहरण कर लिया गया.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कानून के व्याख्याता हैम अब्राहम ने कहा कि हमास की तरफ से किए गए अपराधों के सबूत स्पष्ट हैं. हैम अब्राहम ने कहा कि उन्होंने (हमास) ने नागरिकों का अपहरण कर लिया, उन्हें बंधक बना लिया. ये सभी चीजें स्पष्ट रूप से युद्ध अपराध हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस के अंतर्राष्ट्रीय न्याय आयोग के वकील जीन सुल्जर ने कहा कि जिनेवा कन्वेंशन में कहा गया है कि नागरिकों को कभी भी बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए. यदि वे हैं, तो इसे युद्ध अपराध के रूप में वर्णित किया जा सकता है.

इजरायल पर सामूहिक रूप से दंडित करने का आरोप
इजरायली सेना ने हमास शासित गाजा पर हवाई हमले किए हैं, भोजन, पानी, ईंधन और बिजली की आपूर्ति रोक दी है और संभावित जमीनी हमले से पहले लोगों को पट्टी के उत्तरी आधे हिस्से को छोड़ने के लिए कहा है. गाजा अधिकारियों का कहना है कि बमबारी के दौरान 2,800 लोग मारे गए हैं और 11,000 घायल हुए हैं. वहीं आलोचक इजरायल पर गाजा के 20 लाख निवासियों को सामूहिक रूप से दंडित करने का आरोप लगाते हैं.

जिनेवा स्थित रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति ने कहा है कि सैकड़ों हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने के निर्देश, पूर्ण घेराबंदी के साथ स्पष्ट रूप से उन्हें भोजन, पानी और बिजली से वंचित करना अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुकूल नहीं है. हालांकि, इजरायली सेना का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करती है और केवल वैध सैन्य ठिकानों पर हमला करती है क्योंकि वह नागरिक आबादी के बीच छुपे आतंकवादियों को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने लगाए आरोप
ह्यूमन राइट्स वॉच ने इजरायल पर सफेद फास्फोरस युक्त युद्ध सामग्री का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.  घनी आबादी वाले इलाकों में  सफेद फास्फोरस के इस्तेमाल की व्यापक रूप से निंदा की गई है. हालांकि, इजरायली रक्षा बल ने गाजा में सफेद फास्फोरस को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से इनकार किया है.

वहीं इस दौरान संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग का कहना है कि वह मौजूदा संघर्ष में सभी पक्षों के तरफ से किए गए युद्ध अपराधों के सबूत को जुगाड़ने और शामिल करने का काम किया जा रहा है, जिसके बाद ऐसे सबूतों को फलस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति पर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की तरफ से चलाए जा रहे जांच में शामिल किया जाएगा.

ICC के पास अधिकार
नीदरलैंड स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के पास वॉर से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने के लिए राष्ट्रों के अधिकारियों पर मुकदमा चलाने और पीड़ितों के लिए मुआवजे का आदेश देने की शक्ति है. लेकिन कुछ देश, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और इजरायल शामिल हैं. वो अदालत के क्षेत्राधिकार को मान्यता नहीं देते हैं. इस तरह से आईसीसी के पास गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए पुलिस बल नहीं है.

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