क्या ताजमहल हरा हो जाएगा? यहां जानिए कौन धीर-धीरे बदल रहा है इसका रंग

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सफेद संगमरमर से बना चमकता ताजमहल जिसे दुनिया में प्रेम का प्रतीक माना जाता है, जहां घूमने हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं, उसका रंग बदल रहा है. सबसे बड़ी बात कि ये काम धीरे-धीरे हो रहा था, जिसे अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने पकड़ लिया है. हालांकि, एएसआई भी इससे परेशान है और इससे निपटने के तरीके खोज रही है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर सफेद ताजमहल को हरा कौन कर रहा है.

इसके पीछे कौन है

दरअसल, ये काम एक कीड़ा कर रहा है. इन कीड़ों की पूरी फौज ताजमहल को हरा करने में जुट गई है. साल 2015 में एसएसआई को इसके बारे में पता चला था. उस दौरान इसे रोकने के कई इंतजाम भी किए गए. कोरोना काल के दौरान इन कीड़ों का असर भी कम हुआ, लेकिन अब ये फिर से ताजमहल की दीवारों को हरा करने में जुट गए हैं.

किस तरह के कीड़े हैं ये

हम जिन कीड़ों की बात कर रहे हैं, विज्ञान की भाषा में इन्हें गोल्डी काइरोनोमस कहा जाता है. ये कीड़े  गंदे पानी में पनपते हैं. सबसे परेशानी की बात ये है कि मादा कीट एक बार में हजार से ज्यादा अंडे देती है. ये कीट दो दिनों तक जीवित रहते हैं. हालांकि, इन कीड़ों की संख्या गर्मियों में कम हो जाती है, ऐसा इसलिए क्योंकि ये 35 से 40 डिग्री के ऊपर का तापमान बर्दाश्त नहीं कर पाते. लेकिन सर्दियों में ये ताजमहल के लिए मूसीबत बन जाते हैं.

ये ताजमहल को हरा कैसे बना रहे?

दरअसल, ये कीड़ ताजमहल के जिस हिस्से पर बैठते हैं थोड़ी देर बाद उस हिस्से पर मल त्याग देते हैं. इस मल की वजह से ताजमहल की सफेद दीवारें हरी हो रही हैं. द प्रिंट पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, ये कीड़े ताजमहल की सुंदरता खराब कर रहे हैं. वैज्ञानिक इन्हें खत्म करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है.

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