चीन की वजह से इंडिया-US की रिलेशनशिप होगी और मजबूत! ड्रैगन की चुनौती दोनों देशों को लाएगी करीब

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Indian-American Experts On India China Relations: हाल के कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रिश्तो में बहुत ही ज्यादा मजबूती आयी है. वो भी खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में. इसी बीच हाल ही में भारत और अमेरिका के रिश्ते पर एक प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा कि जब तक चीन खतरा बना रहेगा, तब तक भारत और अमेरिका के संबंधों में घनिष्ठता आती जाएगी. कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में टाटा चेयर फॉर स्ट्रैटेजिक अफेयर्स के एशले टेलिस ने कहा कि आने वाले वर्षों में न केवल दोनों देशों के बीच, बल्कि दोनों समाजों के बीच संबंधों में गहराई देखी जाएगी.

टाटा चेयर फॉर स्ट्रैटेजिक अफेयर्स के एशले टेलिस ने कहा कि भारत-अमेरिका का रिश्ता तब तक गहरा होना तय है जब तक चीन वहां मौजूद रहेगा, जिसे (चीन) दोनों देशों को प्रबंधित करना होगा. चीन के साथ तनाव बरकरार रहने के कारण दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के साथ संबंध मजबूत करने के लिए अमेरिका भारत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

अमेरिका ने भारत को किया अलर्ट
एशले टेलिस ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच रिश्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और जटिल द्विपक्षीय संबंधों में से एक रहा है. साल 1949 के बाद से देशों ने व्यापार, जलवायु परिवर्तन, दक्षिण चीन सागर, ताइवान और कोविड-19 महामारी सहित मुद्दों पर तनाव और सहयोग दोनों का अनुभव किया है. वहीं भारत और चीन के बीच जून 2020 में हुए गलवान घाटी की झड़प ने दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट की वजह बनी थी. इसे पिछले कई दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष माना गया था.

इसके ठीक 2 सालों के बाद सबसे हालिया विवाद बीते 9 दिसंबर 2022 को हुआ था, जब अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. हालांकि, इस दौरान ये दावा किया गया था कि अमेरिका ने पहले ही सैटेलाइट इमेज और रियल टाइम बता कर भारत को अलर्ट कर दिया था.

अमेरिकी भारतीय प्रवासियों पर की बात
वाशिंगटन में फेमस कॉलमिस्ट सीमा सिरोही के एक कार्यक्रम फ्रेंड्स एंड बेनिफिट्स: द इंडिया-यूएस स्टोरी में अमेरिका में भारतीय प्रवासियों पर एशले टेलिस ने कहा कि मेरा मानना है कि आज अमेरिका में प्रवासी भारतीय पहले से कहीं अधिक विभाजित हैं. टेलिस ने कहा कि 2005 में प्रवासी बहुत एकजुट थे. हालांकि, मुझे डर है कि आज प्रवासी भारतीयों के बीच में दरार अधिक से अधिक होती जा रही है और आने वाले सालों में एकजुट नहीं हो पाएंगे.

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