सात्विक, हलाल और वेगन डाइट में क्या होता है अंतर? जानें कैसे की जाती है इसकी पहचान

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Satvik Halal and Vegan: आज के इस युग में हर कोई बहुत कुछ कर रहा है. लोग अपने सिद्धांतों को फॉलो कर रहे हैं, जो मन में आ रहा खा रहे हैं. भारतीय संविधान सभी को अपने हिसाब से जीने की आजादी देता है. लोग भोजन में सात्विक, हलाल और वेगन डाइट भी ले रहे हैं. तीनों खाने के ही प्रकार हैं. फायदा इन तीनों से होता है. हेल्थ के लिए तीनों जरूरी है. लेकिन सवाल यहां यह पैदा होता है कि इसमें अंतर क्या है? मार्केट में जो पैकेट वाले आइटम लोग खरीद कर खा रहे हैं. उसपर तो इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं होती है. आज की स्टोरी इसी बारे में है. आइए समझते हैं.

सात्विक और वेगन डाइट में क्या है अंतर? 

सात्विक डाइट के अंदर आने वाले फूड आइटम में फल, सब्जी और डेयरी प्रोडक्ट आते हैं. इसे कुल मिलाकर शाकाहार कैटेगरी में शामिल किया जा सकता है. वहीं वेगन डाइट में डेयरी प्रोडक्ट को छोड़कर सात्विक के अंदर आने वाले सभी आइटम शामिल होते हैं. वेगन डाइट फॉलो करने वालों का मानना होता है कि वह किसी भी ऐसी चीजों का सेवन नहीं कर सकते जो किसी का हक या उससे छीन कर लाया गया हो. पूर्ण सत्य डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहार सदियों से भारत में एक प्रचलित आहार विकल्प रहा है. कई भारतीय सांस्कृतिक या धार्मिक कारणों से शाकाहार का पालन करते हैं, आबादी का एक बड़ा हिस्सा मांस, पोल्ट्री और समुद्री भोजन से परहेज करता है जबकि अभी भी डेयरी और अन्य पशु उत्पादों को अपने आहार में शामिल करता है. दूसरी ओर वेगन डाइट शाकाहार के सिद्धांतों को एक कदम आगे ले जाता है. वेगन को फॉलो करने वाले लोग न केवल सभी प्रकार के मांस से बचते हैं बल्कि डेयरी, अंडे और किसी भी अन्य पशु से तैयार उत्पादों से भी परहेज करते हैं. 

हलाल का क्या है मतलब?

अब बात आती है कि ये हलाल क्या होता है. देखिए हलाल एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब है ‘जायज़’ या ‘स्वीकार्य’. इसमें इस्लामी परंपरा शामिल होती है. जानवर को हलाल करने की प्रक्रिया में एक खास तरीका अपनाया जाता है. इसमें जानवर की गर्दन की नस और सांस लेने वाली नली को काटने के लिए चाकू का उपयोग करना शामिल है. इसके बाद जानवर को पूरी तरह से खून बहने का समय दिया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान, जानवर की गर्दन को तुरंत नहीं हटाया जाता है; जानवर की मौत के बाद ही इसके हिस्से किए जाते हैं. इस संबंध में जब हमने पूर्ण सत्य डॉट कॉम की सीईओ चाहत अग्रवाल से बात की कि यह हेल्थ के लिए कितना सही है? तो उन्होंने बताया कि गैर हलाल जानवर को खाने से संक्रमण का खतरा होता है. ग्राहकों को इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है, और उनकी कंपनी इसी दिशा में काम कर रही हैं. 

नेशनल न्यूट्रिशन मॉनिटरिंग ब्यूरो के मुताबिक, शहरी भारतीयों की खानपान की आदतें जो निष्क्रिय जीवनशैली के साथ प्रोसेस्ड खानपान की ओर जा रही हैं. इसकी एक रिपोर्ट यह बताती है कि भारत में खाए जाने वाले मशहूर पैकेज्ड में से 80 फीसदी से ज़्यादा हलाल हैं. इससे ग्राहकों की जागरूकता बढ़ाने और उन्हें खानपान की उनकी पसंद के बारे में जानकारी देने के पूर्ण सत्य के उद्देश्य के महत्व को अच्छी तरह समझने में मदद मिलती है, जिससे इस उद्योग में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके. खाने को बांटने के लिहाज से कुछ अन्य कैटेगरी भी है, जिसमें सात्विक, हलाल, कोशर, वेगर और कीटो हैं.

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