UNSC में प्रस्ताव खारिज होने पर रूसी राजदूत ने क्या कहा, पश्चिमी देशों ने रूस पर क्या आरोप लगाए

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UN Security Council Russia Resolution: रूस ने इजरायल-हमास युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था जो देर रात खारिज हो गया. रूस के प्रस्ताव में इजरायल और हमास के बीच युद्ध में नागिरकों के खिलाफ हिंसा को लेकर आलोचना की गई थी. हालांकि प्रस्ताव में हमास का कोई जिक्र नहीं किया गया था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं. इसमें पांच स्थाई सदस्य हैं और बाकी के 10 सदस्य देश अस्थाई सदस्य है. अस्थाई सदस्य देशों के हर दो साल के बाद सदस्यता छोड़नी होती है. स्थाई सदस्य देशों में चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस शामिल हैं. 

रूस के प्रस्ताव पर चीन, संयुक्त अरब अमीरात, मोजाम्बिक और गैबॉन ने समर्थन दिया है जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान ने समर्थन नहीं दिया. 6 सदस्य देश इस दौरान अनुपस्थित रहे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियम के मुताबिक, किसी भी प्रस्ताव को पास करने के लिए कम से कम नौ सदस्य देशों का समर्थन हासिल होना जरूरी है. इस वजह से ही रूस का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया. 

रूस के प्रस्ताव पर मतदान से पहले संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिल नेवेंजिया ने कहा, “रूस का प्रस्ताव हालिया संकट की लगातार बढ़ोतरी के देखते हुए पेश किया गया है. युद्ध में हर घंटे हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है.”

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रस्ताव खारिज होने के बाद वासिल नेवेंजिया ने कहा, “ये बात एक बार फिर से स्थापित हो गई है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पश्चिमी स्वार्थ के जंजाल में फंस गया है. ये परिषद दशकों से हिंसा को रोकने के संदेश को भेजने में नाकाम रही है.” 

ब्रिटेन और अमेरिका ने क्या कहा?

ब्रिटेन की राजदूत बारबरा वुडवर्ड ने कहा, “परिषद में इजरायली हमले की अनदेखी बेशर्मी है. रूसी प्रस्ताव पर ब्रिटेन की राजदूत ने कहा, प्रस्ताव 7 अक्टूबर को हमास के हमले को खारिज करता दिखता है.” 

अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा, “रूसी प्रस्ताव में हमास का जिक्र तक नहीं किया गया, जबकि हमास ने इजरायल को खत्म करने की बात कही है. हमास की निंदा न करके रूस आंतकवादियों को बढ़ावा दे रहा है. हमास के हमले की वजह से ही गाजा में मानवीय संकट पनपा है.”

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